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बच्चों की असरदार तारीफ़ कैसे करें: “शाबाश” की जगह क्या कहें

संक्षेप में

असरदार तारीफ़ नतीजे के बजाय बच्चे के काम और कोशिश को साफ़-साफ़ बताती है। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) व्यवहार के तुरंत बाद तारीफ़ करने और यह बताने की सलाह देते हैं कि क्या अच्छा था, जैसे “तुमने खिलौने समेट दिए!” अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) नतीजे की नहीं, कोशिश की तारीफ़ करने की सलाह देती है।

“शाबाश” काफ़ी क्यों नहीं है?

अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) कहते हैं कि साफ़-साफ़ तारीफ़ धुँधली तारीफ़ से बेहतर है। “शाबाश” से बच्चे को समझना मुश्किल होता है कि उसने क्या अच्छा किया, लेकिन “तुमने खिलौने उनकी जगह पर रख दिए!” साफ़ बताता है कि आप किस व्यवहार की कद्र करते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) भी घर के कामों में नतीजे के बजाय कोशिश की तारीफ़ करने की सलाह देती है, और कहती है कि ईमानदारी से तारीफ़ करना शायद बच्चों को प्रेरित करने का सबसे असरदार तरीका है।

ऐसे कहकर देखें (उदाहरण)

धुँधली तारीफ़ को साफ़ तारीफ़ में बदलने के उदाहरण: शाबाश → तुमने खिलौने उनकी जगह पर रख दिए
साफ़-साफ़ तारीफ़ के उदाहरण। सिद्धांत: अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) · अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) — वाक्य इन सिद्धांतों को लागू करने के उदाहरण हैं।
  • काम का नाम लें: “शाबाश” → “तुमने जूते सलीके से रख दिए!”
  • कोशिश पर ध्यान दें: “तुम कितने होशियार हो” → “तुम उस मुश्किल सवाल पर आख़िर तक लगे रहे।”
  • प्रक्रिया बताएँ: “ब्रश कर लिया? ठीक है” → “तुमने 2 मिनट तक पीछे के दाँतों तक ब्रश किया!”
  • धन्यवाद कहें: “तुम कितने अच्छे हो” → “तुमने पहले छोटे भाई के साथ बाँटा। धन्यवाद।”

तारीफ़ कब और कैसे करें?

  1. तुरंत: CDC कहते हैं कि खासकर छोटे बच्चों में व्यवहार के तुरंत बाद प्रतिक्रिया देना सबसे असरदार होता है।
  2. शब्दों और हाव-भाव से: CDC कहते हैं कि तारीफ़, गले लगाना, हाई-फ़ाइव और साथ बिताया समय जैसे सामाजिक इनाम अक्सर चीज़ों से ज़्यादा असरदार और देने में आसान होते हैं।
  3. ईमानदारी से: AAP ईमानदार तारीफ़ की सलाह देती है। बढ़ा-चढ़ाकर कहने के बजाय, बस वही बताएँ जो बच्चे ने सच में किया।
  4. नतीजे से ज़्यादा कोशिश: AAP नतीजे की नहीं, कोशिश की तारीफ़ करने को कहती है। पहले यह देखें कि वह आख़िर तक लगा रहा या खुद से शुरू किया।

तारीफ़ को आदत कैसे बनाएँ?

व्यस्त दिन में हर बार साफ़-साफ़ तारीफ़ सोचना आसान नहीं। मदद मिलती है अगर दिन ऐसे बनाएँ कि जब भी बच्चा कोई मिशन पूरा करे, तारीफ़ का एक “पल” आए।

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Kids Habit में हर बार बच्चे के मिशन पूरा करने पर एक पल आता है जब माता-पिता उसे मंज़ूर करते हैं। उसी पल एक साफ़ तारीफ़ जोड़ दें।
Kids Habit के साथ ब्रश और होमवर्क की आदत शुरू करेंबच्चा मिशन शुरू करता है, और माता-पिता के मंज़ूर करने पर तारीफ़ पॉइंट जुड़ते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ज़्यादा तारीफ़ से बच्चा बिगड़ जाएगा?

अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) कहते हैं कि साफ़-साफ़ तारीफ़ अच्छा व्यवहार बढ़ाने में मदद करती है। ज़रूरी है तारीफ़ का तरीका, मात्रा नहीं। धुँधली तारीफ़ की जगह असली काम और कोशिश बताएँ।

नतीजा अच्छा न हो तब भी तारीफ़ करूँ?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) नतीजे की नहीं, कोशिश की तारीफ़ करने की सलाह देती है। कोशिश को पहचानें, जैसे “तुम आख़िर तक डटे रहे।”

कौन बेहतर है — चीज़ों वाला इनाम या तारीफ़?

CDC कहते हैं कि तारीफ़, गले लगाना और साथ बिताया समय जैसे सामाजिक इनाम अक्सर चीज़ों से ज़्यादा असरदार और देने में आसान होते हैं।

स्रोत

यह लेख आधिकारिक संस्थाओं की सामग्री पर आधारित पालन-पोषण की सामान्य जानकारी देता है और निदान या इलाज की जगह नहीं लेता। अगर बच्चे की सेहत या विकास को लेकर चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बच्चों के दंत चिकित्सक जैसे विशेषज्ञ से सलाह लें।