बच्चे में पढ़ने की आदत कैसे डालें: अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के 5 सुझाव
बच्चों को किताबें पसंद आएँ, इसके लिए अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) सलाह देती है कि उनके सामने पढ़ें, सोने से पहले साथ पढ़ें, बच्चे की पसंद की किताबें पढ़ें, कॉमिक्स और रेसिपी की किताबों को भी अच्छा पढ़ना मानें और किताबें हाथ की पहुँच में रखें। AAP जन्म से ही साथ पढ़ने की सलाह देती है।
पढ़ना कब शुरू करें और यह क्यों ज़रूरी है?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) बताती है कि साथ पढ़ना माता-पिता और बच्चे का रिश्ता मज़बूत करता है और शुरुआती दिमाग़ी विकास में मदद करता है, और जन्म से प्री-स्कूल उम्र तक साथ पढ़ने की सलाह देती है। वह आगे बताती है कि पढ़ना भाषा और भावनात्मक व सामाजिक कौशल बढ़ाता है, और तनाव में सुकून पाने का एक सेहतमंद तरीका भी है।
बच्चे को किताबों से प्यार कराने के 5 तरीके

- पहले खुद पढ़ें: AAP के अनुसार जो बच्चे माता-पिता को पढ़ते देखते हैं, वे खुद किताब उठाने की ओर ज़्यादा झुकते हैं।
- सोने से पहले साथ पढ़ें: दिन के आख़िर में ज़ोर से पढ़ें और कहानी पर बात करें, जैसे “तुम्हें क्या लगता है, आगे क्या होगा?” AAP छोटे बच्चों के लिए “ब्रश → किताब → बिस्तर” दिनचर्या सुझाती है।
- बच्चा जो पढ़े, वह पढ़ें: उसकी पसंद की किताबें पढ़ने से आपको बात करने के विषय मिलते हैं (AAP)।
- हर तरह का पढ़ना गिना जाता है: AAP के अनुसार कॉमिक्स से लेकर रेसिपी की किताबों तक हर तरह का पढ़ना कीमती अनुभव है।
- किताबें हाथ की पहुँच में और पढ़ने का कोना: किताबें आसानी से पहुँचने वाली जगह रखें और एक आरामदायक “पारिवारिक पढ़ने का कोना” बनाएँ (AAP)। AAP लाइब्रेरी कार्ड बनवाने की भी सलाह देती है।
पढ़ना रोज़ की आदत कैसे बने?
पढ़ना तब आसानी से आदत बनता है जब यह “जब समय मिले” नहीं, बल्कि रोज़ एक ही समय पर हो। इसे शाम की दिनचर्या में शामिल करें या बच्चे के किसी मौजूदा काम से जोड़ें, जैसे रात के खाने के बाद।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बच्चों को रोज़ कितने मिनट पढ़ना चाहिए?
हमें “रोज़ के मिनट” में कोई आधिकारिक सलाह नहीं मिली। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) समय से ज़्यादा रोज़ साथ पढ़ने की आदत और आनंद पर ज़ोर देती है। ऐसे छोटे समय से शुरू करें जिससे बच्चा ऊबे नहीं।
अगर बच्चा सिर्फ़ कॉमिक्स पढ़ता है तो क्या ठीक है?
AAP के अनुसार कॉमिक्स से लेकर रेसिपी की किताबों तक हर तरह का पढ़ना कीमती अनुभव है।
बच्चा खुद पढ़ लेता है, तो क्या अब भी उसे पढ़कर सुनाऊँ?
AAP बताती है कि साथ पढ़ना रिश्ता मज़बूत करता है और कहानी पर बात करने का मौका देता है। बच्चा खुद पढ़े तब भी सोने से पहले साथ पढ़ने का समय बनाए रखें।
स्रोत
यह लेख आधिकारिक संस्थाओं की सामग्री पर आधारित पालन-पोषण की सामान्य जानकारी देता है और निदान या इलाज की जगह नहीं लेता। अगर बच्चे की सेहत या विकास को लेकर चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बच्चों के दंत चिकित्सक जैसे विशेषज्ञ से सलाह लें।